प्रस्तावना (Introduction)
अगर आपने कभी Mutual Fund में निवेश किया है या करने की सोच रहे हैं, तो आपने NAV शब्द ज़रूर सुना होगा।
बहुत से शुरुआती लोग (beginner) यही सोचते हैं:

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- NAV ज़्यादा हो तो फंड महँगा (expensive) है?
- NAV कम हो तो फंड सस्ता (Cheap) है?
- NAV रोज़ क्यों बदलता (Changing) है?
अगर आपके मन में भी ऐसे सवाल (Question) हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए ही है।
इस लेख में हम Mutual Fund NAV को बिल्कुल आसान भाषा में, step-by-step समझेंगे ताकि कोई भी नई लोग (beginner) भ्रम (confusion) के बिना इसे समझ सके।
Mutual Fund NAV क्या होता है?
NAV का पूरा नाम है – (Net Asset Value)
आसान भाषा में:
NAV बताता है कि Mutual Fund की एक यूनिट की कीमत (price) क्या है।
जैसे:
- अगर किसी fund का NAV ₹20 है
- तो इसका मतलब है कि एक यूनिट की मूल्य (price) ₹20 है
बस इतना समझना (Understand) शुरुआत के लिए काफी है।
NAV को आसान उदाहरण से समझिए
मान लीजिए:
- एक Mutual Fund के पास कुल assets हैं = ₹100 करोड़
- Total units = 10 करोड़
तो:
NAV = Total Assets ÷ Total Units
₹100 करोड़ ÷ 10 करोड़ = ₹10 NAV
यानि fund की 1 यूनिट = ₹10
NAV रोज़ क्यों बदलता है?
यह सवाल शुरुआती लोग (beginner) सबसे ज़्यादा पूछते हैं।
NAV बदलने के कारण:
- Share market ऊपर–नीचे (Up and down) होता है
- Fund के अंदर मौजूद shares की कीमत बदलती (price changes) है
- इसी वजह (Reason) से total assets बदलते हैं
Market ऊपर = NAV बढ़ता (Increasing) है
Market नीचे = NAV घटता (decreasing) है
इसलिए NAV हर कार्य दिवस की गणना (working day calculate) किया जाता है।
NAV कब update होता है?
भारत में:
- Mutual Fund NAV हर दिन 9, रात 10 बजे के बाद update होता है
- यह update market बंद होने के बाद (after) किया जाता है
इसलिए:
- दिन में NAV देखने का कोई मतलब नहीं
- हमेशा latest available NAV ही देखें
NAV कम हो तो फंड सस्ता होता है?
नहीं, बिल्कुल नहीं।
यह सबसे बड़ी शुरुआती मिथक (beginner myth) है।
सच्चाई:
- NAV कम या ज़्यादा (More or less) होने से fund सस्ता या महँगा नहीं होता
- Fund का प्रदर्शन (performance) NAV से नहीं, धन वापसी (returns) से पता चलता है
Example:
- Fund A: NAV ₹10
- Fund B: NAV ₹100
दोनों का return % एक जैसा हो सकता है।
NAV share price नहीं है, इसलिए तुलना गलत (Wrong) है।
NAV और Share Price में फर्क
| शेयर की कीमत (Share Price) | NAV |
|---|---|
| मांग-आपूर्ति (Demand–supply) से बदलती है | संपत्ति (Assets) के हिसाब से |
| पूरे दिन बदलती है | दिन में एक बार |
| Company तय (decide) नहीं करती | AMC calculate करती है |
यह फर्क (difference) समझना बहुत ज़रूरी है।
NAV कैसे calculate किया जाता है?
Formula (आसान भाषा में):
NAV = (Total Assets – Total Liabilities) ÷ Total Units
इसमें क्या-क्या शामिल (Involved) होता है?
- Shares
- Bonds
- Cash (नकद)
- Expenses (खर्च)
- Management fees
AMC (Asset Management Company) यह calculation SEBI नियम (rules) के अनुसार करती है।
SIP में NAV का क्या role है?
SIP में:
- हर महीने उसी दिन का NAV आवेदन (apply) होता है
- NAV कम हो → ज़्यादा इकाइयां (units) मिलती हैं
- NAV ज़्यादा हो → कम units मिलती हैं
यही प्रक्रिया (process) रुपये की लागत (Rupee Cost) औसत (Averaging) कहलाता है।
NAV और Long Term Investment
Long term में:
- NAV अपने आप बढ़ता है
- SIP से इकाइयां (units) जमा होती रहती हैं
- Compounding का फायदा (Benefit) मिलता है
इसलिए:
रोज़ NAV देखना बेकार है
दीर्घकालिक (Long term) लक्ष्य (goal) पर focus करें
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Beginners की NAV से जुड़ी आम गलतियाँ
- Low NAV देखकर fund चुनना
- High NAV देखकर fund avoid करना
- Daily NAV पता (track) करना
- NAV गिरते ही SIP बंद करना
ये सभी गलतियाँ नुकसान (Loss) करा सकती हैं।
NAV से क्या check करना चाहिए?
NAV से नहीं, बल्कि ये देखें:
- Fund category (कोष श्रेणी)
- Expense ratio (खर्चे की दर)
- Long term returns (दीर्घकालिक धन वापसी)
- Risk profile (जोखिम रूपरेखा)
NAV सिर्फ गणना (calculation) का औजार (tool) है, निर्णय (decision) का नहीं।
NAV और Safety
NAV गिरना:
- नुकसान (Loss) नहीं होता जब तक आप बिक्री न करें
- Market उगाही (recovery) पर NAV फिर बढ़ सकता है
इसलिए:
“NAV गिरना normal है, घबड़ाहट (panic) करना गलत।”
Beginners के लिए NAV से जुड़ी जरूरी बातें
- NAV मूल्य (price) नहीं, महत्व (value) दिखाता है
- Daily बदलना (change) normal है
- SIP में NAV आपके पक्ष (favor) में काम करता है
- Long term में NAV विकास महत्वपूर्ण (growth important) है
Conclusion
Mutual Fund NAV को समझना मुश्किल (difficult) नहीं है, बस इसे सही (Correct) नजरिए से देखना ज़रूरी है।
NAV:
- ना तो fund को सस्ता (Cheap) बनाता है
- ना ही महँगा (expensive)
असली फर्क (difference) पड़ता है:
Time + Discipline + Right Fund Selection
अगर आप NAV को समझ (Understanding) गए, तो Mutual Fund की आधी भ्रम (confusion) अपने आप दूर हो जाती है।
Disclaimer
यह पोस्ट केवल शैक्षिक उद्देश्य (educational purpose) के लिए है। निवेश (investment) से पहले अपनी खोज (research) करें या वित्तीय सलाहकार (financial advisor) से सलाह लें।