अगर आप स्टॉक मार्केट या म्यूचुअल फंड में नए इन्वेस्टर हैं,
तो आपने शायद कहीं “ETF” शब्द सुना ही होगा।
लेकिन ज़्यादातर लोग पूरी तरह से नहीं समझते कि ETF क्या होता है,
यह इंडेक्स फंड जैसा क्यों होता है,
और दोनों के बीच क्या अंतर हैं? आज आप इस पोस्ट में ETF के बारे में पूरी जानकरी के साथ समझेंगे !

तो, आइए आज इस कॉन्सेप्ट को आसान और सीधी भाषा में समझते हैं—
ताकि इसे पढ़ने के बाद आपके मन में यह सवाल कभी न आए कि “ETF क्या है?”
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What is the Full Form of ETF? (ETF का फुल फॉर्म क्या है?)
ETF का पूरा नाम एक्सचेंज ट्रेडेड फंड है।
यह नाम थोड़ा मुश्किल लग सकता है, लेकिन इसका मतलब काफी आसान है—
यह एक ऐसा फंड है जो स्टॉक मार्केट में कोई भी स्टॉक की तरह ही ट्रेड होता है, लेकिन अंदर से यह म्यूचुअल फंड की तरह काम करता है।
आसान शब्दों में इसका मतलब—
ETF = म्यूचुअल फंड + शेयर ट्रेडिंग का हाइब्रिड वर्जन है।
How Does an ETF Work? (ETF कैसे काम करता है?)
मान लीजिए आप एक ETF खरीदते हैं—
जैसे कि “निफ्टी 50 ETF।”
तो, जब आप एक ETF यूनिट खरीदते हैं,
तो आप असल में 50 निफ्टी कंपनियों का बहुत छोटा हिस्सा खरीद रहे होते हैं।
यानी, एक ETF यूनिट =
रिलायंस + TCS + इंफोसिस + HDFC बैंक + ICICI बैंक + बाकी सभी निफ्टी कंपनियाँ।
एक ETF का काम उस इंडेक्स को फॉलो करना होता है जिसे वह ट्रैक करता है—
ठीक वैसे ही जैसे एक इंडेक्स फंड करता है।
लेकिन फर्क यह है कि आप स्टॉक मार्केट में ETF को वास्तविक काल (real time) में खरीद और बेच सकते हैं।
जबकि आप इंडेक्स फंड सिर्फ़ म्यूचुअल फंड कंपनी से दिन के आखिर में ही खरीद सकते हैं।
Structure of ETF (ईटीएफ की संरचना)
ETF दो लेवल पर काम करते हैं:
फंड हाउस (AMC)
यह फंड इंडेक्स को ट्रैक करता है।
जैसे HDFC AMC, निप्पॉन इंडिया, ICICI प्रूडेंशियल, वगैरह।
स्टॉक एक्सचेंज (NSE/BSE)
यहां, ETF यूनिट्स शेयरों की तरह ट्रेड होती हैं।
आप इन्हें लाइव कीमतों पर खरीद और बेच सकते हैं।
इस तरह, एक ETF के साथ, आपको म्यूचुअल फंड की सिक्योरिटी
और स्टॉक मार्केट की लिक्विडिटी दोनों का फायदा आसानी से मिलता है।
Types of ETFs in India (भारत में ईटीएफ के प्रकार)
आज के समय में भारत में कई तरह के ETF उपलब्ध हैं।
इसमें से सबसे पॉपुलर टाइप नीचे दिए गए हैं:
- इंडेक्स ETF
यह किसी इंडेक्स (जैसे निफ्टी 50, सेंसेक्स, निफ्टी नेक्स्ट 50) को भी ट्रैक करता है।
यह सबसे आम है और नए निवेशकों के लिए सबसे अच्छा भी है।
- गोल्ड ETF
यह सिर्फ़ सोने की कीमत को ही ट्रैक करता है।
अगर आप “डिजिटल गोल्ड” में निवेश करना चाहते हैं तो यह आप के लिए एक बढ़िया और सही ऑप्शन है।
- सेक्टोरल ETF
यह किसी खास सेक्टर को ट्रैक करता है, जैसे बैंकिंग, IT, या ऑटोमोबाइल।
यह एक्सपर्ट निवेशकों के लिए बहुत अच्छा है।
- बॉन्ड ETF
यह सरकारी या कॉर्पोरेट बॉन्ड में निवेश करता है।
इसमें रिस्क बहुत कम होता है, लेकिन रिटर्न थोड़ा स्थिर यानि कम होता है।
5. इंटरनेशनल ETF
यह Apple, Amazon, Tesla जैसी कई विदेशी कंपनियों में सीधे आपको निवेश करने का मौका देता है।
How do You Make Money With ETF? (आप ETF से पैसे कैसे कमाएंगे?)
आप ETFs से कई तरह से फ़ायदा उठा सकते हैं:
- कैपिटल एप्रिसिएशन –
- ETF यूनिट्स की वैल्यू समय के साथ बढ़ती है।
- उदाहरण के लिए, अगर आपने ₹100 में एक ETF यूनिट खरीदी,
- और एक साल बाद उसकी वैल्यू बढ़कर ₹120 हो गई,
- तो आपको ₹20 का प्रॉफ़िट होगा।
- डिविडेंड इनकम –
- कुछ ETF अपनी कंपनियों का डिविडेंड अपने इन्वेस्टर्स को देते हैं।
- लेकिन, यह सभी ETF पर लागू नहीं होता है।
Difference Between ETF and Index Fund (ईटीएफ और इंडेक्स फंड के बीच अंतर)
| Aspect of Comparison | ETF | Index Fund |
| How to Buy | From the Share Market (Demat Account required) | From AMC or App (like Groww, ET Money) |
| Transaction Time | Anytime During Market Hours | At the end of the day (as per NAV) |
| Liquidity | More, Because you can buy and sell instantly | Lower, as the order goes to AMC |
| Minimum Investment | As much as 1 unit (₹100–₹500) | You can start SIP with ₹100 or |
| Expense Ratio | Very low (0.05%–0.3%) | Slightly higher (0.2%–1%) |
| Price Fluctuation | Changes in real time | Updated once a day |
तो, अगर आप एक “एक्टिव ट्रेडर” हैं, तो ETF आपके लिए बहुत ही सही रहेगा।
लेकिन अगर आप “लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर” हैं, तो इंडेक्स फंड बहुत ज़्यादा बेहतर रहेगा।
Advantages of ETF (ईटीएफ के फायदे)
कम खर्च अनुपात
ETFs में मैनेजर फीस बहुत ही कम होती है, इसलिए आपके ज़्यादा पैसे रिटर्न में मिलते हैं।
रियल-टाइम ट्रेडिंग
आप स्टॉक की तरह ही किसी भी समय आसानी से ETFs खरीद या बेच सकते हैं।
यह फ्लेक्सिबिलिटी इंडेक्स फंड्स में नहीं मिलती है।
डायवर्सिफिकेशन
ETFs एक साथ कई कंपनियों में निवेश करते हैं—
जिससे आपका रिस्क काफी कम हो जाता है।
पारदर्शिता
ETF की होल्डिंग्स रोज़ाना सार्वजनिक रूप से बताई जाती हैं, इसलिए आपको हमेशा पता रहता है कि आपका पैसा कहाँ निवेश किया गया है।
टैक्स दक्षता
ETFs में कम खरीद-बिक्री होती है, इसलिए टैक्स का बोझ भी बहुत कम होता है।
Disadvantages of ETF (ईटीएफ के नुकसान)
डीमैट अकाउंट ज़रूरी है
ETFs में इन्वेस्ट करने के लिए आपके पास डीमैट अकाउंट होना ही चाहिए।
ब्रोकरेज चार्ज
हर ट्रेड पर ब्रोकरेज चार्ज और एक्सचेंज फीस भी लगती है।
इससे छोटे इन्वेस्टर्स के लिए लागत थोड़ी बढ़ भी सकती है।
लिक्विडिटी रिस्क
कुछ ETFs ज़्यादा एक्टिव नहीं होते हैं, इसलिए कभी-कभी खरीदारों या बेचने वालों की कमी के कारण ट्रेड तुरंत नहीं हो पाता है।
मार्केट में उतार-चढ़ाव
ETF की कीमतें हर मिनट बदलती रहती हैं, इसलिए नए इन्वेस्टर्स को ये थोड़े अस्थिर भी लग सकते हैं।
ETF में निवेश कैसे करें? (How to Invest in ETF? (Step-by-Step Guide)
- ETFs में इन्वेस्ट करना बहुत ही आसान है:
ज़ेरोधा, ग्रोव, अपस्टॉक्स, एंजेल वन जैसे ऐप पर
डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट एक साथ खोलें।
- एक ETF चुनें
जैसे निप्पॉन इंडिया निफ्टी 50 ETF, SBI सेंसेक्स ETF, HDFC गोल्ड ETF, वगैरह।
- मार्केट प्राइस चेक करें
ETF की मौजूदा ट्रेडिंग कीमत देखें।
- खरीदने का ऑर्डर दें
जितनी यूनिट्स चाहिए, उतनी खरीदें।
- होल्ड करें या बेचें
कंपाउंडिंग का फ़ायदा उठाने के लिए लंबे समय तक होल्ड करें।
Some Popular ETF in India (भारत में कुछ लोकप्रिय ETF (2026 तक)
| Name of the ETF | The index to track | Average Return (5 years) |
| Nippon India ETF Nifty BeES | Nifty 50 | 13.8% |
| SBI Sensex ETF | Sensex 30 | 13.5% |
| HDFC Gold ETF | Gold Price | 8.2% |
| ICICI Prudential Nifty Next 50 ETF | Nifty Next 50 | 15.2% |
| Motilal Oswal Nasdaq 100 ETF | Nasdaq 100 (US) | 17.5% |
Who is an ETF Right For? (ETF किसके लिए सही है?)
ETFs उन लोगों के लिए सबसे अच्छे और सही हैं जो:
स्टॉक मार्केट में थोड़ा अनुभव भी रखते हैं
रियल-टाइम खरीदने और बेचने की सुविधा भी चाहते हैं
कम लागत पर एक डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो भी बनाना चाहते हैं
लंबे समय के लिए अपनी दौलत बनाना चाहते हैं
अगर आप बिल्कुल नए हैं और आपके पास डीमैट अकाउंट नहीं है,
तो पहले इंडेक्स फंड से शुरुआत करें।
फिर धीरे-धीरे ETF पर जाएं।
ETF and Index Funds – Which is Better? (ETF और इंडेक्स फंड – कौन सा बेहतर है?)
दोनों के अपने-अपने फायदे हैं:
अगर आप आसान और ऑटोमेटेड इन्वेस्टिंग चाहते हैं, तो इंडेक्स फंड बहुत बेहतर है।
अगर आप कंट्रोल और फ्लेक्सिबिलिटी चाहते हैं, तो ETF ही बेहतर है।
ETF और इंडेक्स फंड दोनों ही पैसिव इन्वेस्टिंग के बेहतरीन और सही तरीके हैं, जहाँ आप स्टॉक चुनने की परेशानी के बिना आसानी से पूरे मार्केट की ग्रोथ का फायदा उठा सकते हैं।
Conclusion:
ETFs एक सुविधाजनक मॉडर्न इन्वेस्टमेंट टूल है जो म्यूचुअल फंड की सुरक्षा को स्टॉक मार्केट की लिक्विडिटी के साथ मिलाता है।
अगर आप लंबे समय में अपनी दौलत बढ़ाना चाहते हैं,
बहुत कम लागत पर पूरे मार्केट में हिस्सा लेना चाहते हैं,
और आपको मार्केट की थोड़ी समझ है—
तो ETFs आपके लिए एकदम सही विकल्प हैं।
स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करना हमेशा उतार-चढ़ाव से भरा होता है,
लेकिन ETFs एक ऐसा तरीका है
जो आपको एक स्मार्ट, डाइवर्सिफाइड और स्थिर इन्वेस्टमेंट का अनुभव भी देता है।